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Bihar weather News:बिहार के 25 जिलों में बारिश का अलर्ट, 40 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं; बिजली गिरने का खतरा

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में मौसम ने करवट ली है। 25 जिलों में बारिश, तेज हवा और वज्रपात का अलर्ट जारी किया गया है। गंगा का जलस्तर भी बढ़ रहा है।

पटना, 23 अगस्त। बिहार में मानसून की गतिविधियां एक बार फिर बढ़ने लगी हैं। मौसम विभाग ने रविवार को राज्य के 25 जिलों में बारिश, तेज हवा और वज्रपात को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर हवा की रफ्तार 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। मौसम में बदलाव के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग के अलर्ट वाले जिलों में उत्तर और पश्चिमी बिहार के कई इलाके शामिल हैं। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीतामढ़ी, शिवहर, सीवान, मुजफ्फरपुर, सारण और वैशाली में बारिश के साथ तेज हवा चलने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा बक्सर, भोजपुर, कैमूर, रोहतास, अरवल, औरंगाबाद, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार में भी मौसम को लेकर चेतावनी जारी की गई है।

उत्तर बिहार के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। कुछ इलाकों में गरज के साथ तेज बौछारें पड़ सकती हैं। इसके विपरीत दक्षिण बिहार के बड़े हिस्से में रविवार को मौसम अपेक्षाकृत सामान्य रहने का अनुमान है। हालांकि बादल छाने और स्थानीय स्तर पर बारिश की संभावना बनी रहेगी।

तेज हवा और वज्रपात का खतरा

बारिश के साथ तेज हवा और आकाशीय बिजली मौसम विभाग की चिंता का प्रमुख कारण है। 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवा चलने की स्थिति में पेड़ और कमजोर संरचनाओं को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में लोगों को मौसम खराब होने के दौरान खुले स्थानों से बचने की सलाह दी गई है।

बिजली चमकने और गरजने के दौरान खेत, मैदान, नदी किनारे और अन्य खुले स्थानों पर रहने से बचना जरूरी है। किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।

बिहार में अब भी बारिश की बड़ी कमी

राज्य में मानसून के दौरान बारिश की स्थिति अब तक सामान्य नहीं हो सकी है। 22 अगस्त तक बिहार में 411.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश का आंकड़ा 701.5 मिलीमीटर होना चाहिए था। इस तरह राज्य में करीब 41 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है।

सीतामढ़ी, सहरसा और अररिया समेत कई जिलों में बारिश की कमी ज्यादा है। मानसून की कमजोर स्थिति का असर खेती पर भी पड़ा है। ऐसे में आने वाले दिनों में होने वाली बारिश कृषि के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है।

पटना में अगले चार दिनों तक छाए रहेंगे बादल

राजधानी पटना में भी मौसम पूरी तरह साफ रहने की संभावना नहीं है। अगले चार दिनों तक आसमान में बादल छाए रहने और रुक-रुककर बारिश या बौछारें पड़ने का अनुमान है।

रविवार को पटना में अधिकतम तापमान करीब 35 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। 24 और 25 अगस्त को भी बादल छाए रह सकते हैं। वहीं 26 अगस्त को अधिकतम तापमान में गिरावट आने का अनुमान है और यह करीब 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

गंगा के बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता

एक तरफ बिहार में बारिश की कमी बनी हुई है तो दूसरी तरफ नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कई इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। उत्तराखंड में हुई भारी बारिश के बाद गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी की स्थिति बनी हुई है। पटना के गांधी घाट पर गंगा का पानी खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने की बात सामने आई है।

गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर नदी किनारे के इलाकों में दिखाई देने लगा है। निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बाढ़ का खतरा सताने लगा है। प्रशासन की ओर से भी नदी के जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

मुंगेर और खगड़िया में भी बढ़ी परेशानी

मुंगेर में प्रसिद्ध चंडिका स्थान मंदिर का गर्भगृह बाढ़ के पानी से प्रभावित हुआ है। वहीं खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड में बाढ़ का पानी बस्तियों तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

ग्रामीण इलाकों में जलभराव के कारण आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई जगहों पर बच्चों को पानी से होकर स्कूल जाने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन और रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।

बारिश और बाढ़ दोनों पर नजर

बिहार के लिए मौजूदा मौसम की स्थिति दोहरी चुनौती लेकर आई है। राज्य के कई हिस्से अभी भी सामान्य से कम बारिश की समस्या से जूझ रहे हैं, वहीं गंगा और दूसरी नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण कुछ क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है।

ऐसे में अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। मौसम विभाग के अलर्ट के बीच प्रशासन को संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। वहीं आम लोगों से अपील है कि तेज हवा, वज्रपात और बारिश के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करें।

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बारिश की कमी और बढ़ता जलस्तर, बिहार के सामने दोहरी चुनौती

बिहार में मानसून की तस्वीर इस समय बेहद असमान दिखाई दे रही है। एक तरफ राज्य में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है, वहीं दूसरी तरफ गंगा के बढ़ते जलस्तर ने नदी किनारे बसे इलाकों में बाढ़ की चिंता बढ़ा दी है।

बारिश की कमी सीधे तौर पर खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है। किसानों के लिए समय पर बारिश बेहद जरूरी है, लेकिन दूसरी ओर अचानक नदियों का जलस्तर बढ़ना निचले इलाकों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। यही वजह है कि मौसम विभाग का ताजा अलर्ट सिर्फ बारिश की सूचना नहीं बल्कि सावधानी का संदेश भी है।

25 जिलों में बारिश, तेज हवा और वज्रपात की संभावना को देखते हुए लोगों को मौसम की चेतावनियों को गंभीरता से लेना चाहिए। खासकर खुले इलाकों में काम करने वाले किसानों और ग्रामीणों को आकाशीय बिजली के समय अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।

प्रशासन के सामने भी दोहरी चुनौती है। जहां कम बारिश वाले जिलों में खेती की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है, वहीं नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए संभावित बाढ़ से निपटने की तैयारी भी मजबूत रखनी होगी। आने वाले दिनों में बारिश और नदियों के जलस्तर की स्थिति ही तय करेगी कि बिहार के लिए यह मानसून राहत लेकर आता है या नई चुनौती।

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